सही उत्तर:
हरिगीतिका छंद एक सममात्रिक छंद है, जिसका अर्थ है कि इसके सभी चरणों में मात्राओं की संख्या समान होती है। प्रत्येक चरण में 28 मात्राएँ होती हैं, और 16 और 12 मात्राओं पर यति (विराम) होता है। 16 मात्राओं के बाद एक छोटा विराम और फिर 12 मात्राओं के बाद एक पूर्ण विराम होता है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक चरण के अंत में लघु और गुरु वर्ण का प्रयोग किया जाता है ।
उदाहरण :
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन, हरण भव भय दारुणम् ।
नवकंज लोचन कंज मुख कर, कंज पद कन्जारुणम ॥