जब किसी बात को सीधे न कहकर किसी अन्य व्यक्ति, वस्तु या प्रसंग के माध्यम से व्यक्त किया जाता है, उसे अन्योक्ति अलंकार कहते हैं।
"नहिं पराग, नहिं मधुर मधु, नहिं विकास इहि काल।
अली कली ही सो बंध्यो, आगे कौन हवाल।।"
व्याख्या: यहाँ कवि ने भौंरे और कली के माध्यम से किसी अन्य स्थिति (राजनीतिक या सामाजिक) की ओर संकेत किया है, इसलिए यह अन्योक्ति अलंकार का उदाहरण है।